नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे सौरभ के परिजन

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मेरठ
 नीला ड्रम केस यानी सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड पाने वाली मुस्कान ने हाईकोर्ट में अपील की तैयारी शुरू कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को हत्या के दोषी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को सजा सुनाई थी। जेल सूत्रों के अनुसार बुधवार को सजा सुनाए जाने के बाद रात को मुस्कान अपनी 11 माह की बेटी राधा को सीने से लगाकर रोती रही। गुरुवार सुबह मुस्कान उठी और नाश्ते के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से हाईकोर्ट में अपील का रास्ता पूछा। पूरी प्रक्रिया बताने की मांग कर कानूनी मदद मांगी। दूसरी ओर, मुस्कान के परिजनों ने उससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मुस्कान को उसके जुर्म की सजा मिली है। वहीं, सौरभ के परिजनों ने भी कहा कि वे दोनों का पीछा सुप्रीम कोर्ट तक नहीं छोड़ने वाले। वहीं जेल प्रशासन शुक्रवार को इस मामले में कोर्ट को पत्र भेजकर सजा के आदेश की कॉपी मांगेगा। सजा के खिलाफ एक माह के अंदर हाईकोर्ट में अपील करना जरूरी होता है।

वहीं साहिल और मुस्कान की समाज में वापसी की संभावना नहीं है। उन्होंने जिस तरह से अपराध किया, उसके बाद कई ऐसी घटनाएं हुई। नीला ड्रम पारिवारिक रिश्ते में आतंक का पर्याय बन गया। कोर्ट ने माना कि दोनों आरोपियों का परिवार से कोई खास ताल्लुक नहीं है और न ही उनमें सुधार की संभावना है। ऐसे में अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड को सही ठहराया। कोर्ट ने माना कि मुस्कान ने अपने पति सौरभ के विश्वास और प्रेम को बड़ी बेरहमी से कुचला। सौरभ राजपूत को एक क्रूर मौत का शिकार बनना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक रिश्ते में यह कुरूपता घटना को विरलतम बनाती है। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि साहिल और मुस्कान की अभी तक की जेल में रहने की अवधि से यह पता किया जा सकता कि दोषियों में सुधार की संभावना है। साहिल द्वारा पिता से मिलने में कोई रूचि नहीं दिखाई गई और न ही मुस्कान ने बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जताई।

डेढ़ साल में मुस्कान से मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं गया। ऐसे में साफ है कि दोनो का व्यवहार सामान्य नहीं है। यह मानना मुश्किल है कि आरोपी ऐसा काम नहीं करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान भी दोषियों में कोई अपराध बोध नहीं दिखाई दिया। ऐसे में साहिल और मुस्कान के सुधार और समाज में वापसी की संभावना का अभाव है। कोर्ट ने माना कि नीला ड्रम परिवारजनों के एकांत के क्षणों और स्थानों में भय व आशंका का प्रवेश हुआ। युवा मन में विवाद के प्रति एक अज्ञात भय जन्मा है।

कोर्ट ने कहा कि सौरभ की हत्या के बाद शव और साक्ष्य को छिपाने का तरीका भी चौकाने वाला था, जिसने समाज की अंतरात्मा को हिला दिया। कातिलों को अपने अपराध का कोई पछतावा या अपराध बोध नहीं है। साहिल और मुस्कान को सजा के आदेश में महाभारत के एक अन्य श्लोक का भी हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया कि जिस राज्य में राजा दंड में रूचि रखता है, वहां धर्म बचा रहता है।

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