चंडीगढ़ में 12,752 फ्लैट आवंटियों पर संकट, किस्त जमा नहीं करने पर बेदखली की कार्रवाई संभव

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चंडीगढ़.

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने छोटे फ्लैट्स और किफायती आवासीय परिसरों में रहने वाले 12,752 आवंटीज पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। किस्त बकाया रहने की वजह से सीएचबी कभी भी सख्त फैसला ले सकता है। इसके लिए सूची भी जारी कर दी है।

सीएचबी के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे फ्लैट योजना के तहत 11,317 आवासीय इकाइयों, जबकि मलोया स्थित किफायती किराये के आवासीय परिसरों (एआरएचसी) की 1,435 इकाइयों का किराया 31 जुलाई 2026 तक बकाया है। ये आवास सेक्टर-49, सेक्टर-56, सेक्टर-38 पश्चिम, धनास, औद्योगिक क्षेत्र फेज-1, मौलीजागरां, मलोया और रामदरबार समेत विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं।
सीएचबी ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस डीड के तहत आवंटीज को प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक लाइसेंस शुल्क जमा करना अनिवार्य है। इसके लिए अलग से मांग पत्र जारी नहीं किया जाता। देरी से भुगतान पर 12 प्रतिशत सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज भी लगाया जा रहा है। लाइसेंस डीड की धाराओं 2 और 12 के तहत भुगतान शर्तों का उल्लंघन करने पर बोर्ड को लाइसेंस रद्द करने का अधिकार है। ऐसे में बकाया राशि जमा नहीं करने वाले परिवारों की आवासीय सुविधा समाप्त की जा सकती है।

401 रुपये से लेकर 2.45 लाख तक बकाया
जारी सूची में बकाया राशि में काफी अंतर है। कुछ आवंटीज पर महज 401 रुपये बकाया हैं, जबकि कई मामलों में यह राशि बढ़कर करीब 2.45 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बोर्ड ने सभी निवासियों से तत्काल बकाया किस्त जमा करने की अपील की है, ताकि बेदखली जैसी कार्रवाई से बचा जा सके। छोटे फ्लैट और एआरएचसी योजनाएं शहर के कामकाजी वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कम लागत पर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थीं। इन आवासों का आवंटन लाइसेंस आधारित व्यवस्था के तहत किया गया था, जिसमें लाभार्थियों को हर महीने निर्धारित किराया देना होता है।

करीब 90 आवंटन पहले ही रद
सीएचबी ने हाल ही में किस्त नहीं देने के कारण स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 और एआरएचसी योजना के करीब 90 लाभार्थियों का आवंटन रद किया है। अब बड़ी संख्या में बकायेदारों की सूची सामने आने के बाद उन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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