भारत पर 100% टैरिफ के फैसले से अमेरिका में ही विरोध, अपनों ने कहा- ‘आत्मघाती कदम’

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वॉशिंगटन
रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर टैरिफ लगाने वाले बिल को बहुमत से मंजूरी दे दी है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष आयातक हैं। 

हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में ही विरोध होने लगा है. एक अमेरिका सीनेटर ने तो इस कदम पर सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा, 'ऐसे समय में जब हम चीन के साथ चल रहे कंपटीशन में मदद करने के लिए भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, भारत पर 100% टैरिफ लगाना पूरी तरह से आत्मघाती कदम है' .

अमेरिकी सीनेटर्स ने दी ट्रंप प्रशासन को चेतावनी

अमेरिकी सीनेटर रॉब वाइडेन और रैंड पॉल ने भारत और चीन पर प्रस्तावित 100% टैरिफ का विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से अमेरिकी हितों को नुकसान हो सकता है और अहम साझेदारों के साथ रिश्तों में तनाव आ सकता है। उन्होंने कहा 'ऐसे समय में जब हम चीन के साथ मुकाबले में मदद के लिए भारत को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं उस पर 100% टैरिफ लगाना पूरी तरह से हमारे अपने ही हितों के खिलाफ होगा।'

अमेरिकी सीनेटर्स ने अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर बहस के दौरान अपनी गहरी आपत्तियां जताईं हैं। हालांकि आपत्तियों के बावजूद ये बिल बहुमत से पास हुआ है। सीनेटर पॉल ने प्रस्तावित टैरिफ को अमेरिका के लिए 'अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने' जैसा बताया और कहा कि इतने भारी शुल्क से भारत के साथ वॉशिंगटन के रिश्ते अस्थिर हो सकते हैं। रॉब वाइडेन ने भी भारत पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित टैरिफ का विरोध किया है।

अमेरिका में कौन सा बिल पास हुआ?
अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक बड़ा विधेयक पास किया है, जिसका मकसद रूस की ऊर्जा कमाई पर चोट करना है. ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी मिली. इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार दिया गया है कि जो देश रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखेंगे, उनके सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस लिस्ट में भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार देशों के साथ अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया भी शामिल हैं. विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके सहयोगियों, ओलिगार्क्स और वित्तीय संस्थानों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। 

डेमोक्रेट सांसद भी परेशान
लांकि, इस बिल को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी मतभेद सामने आ रहे हैं. कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने भी चिंता जताई है कि इससे राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की बहुत ज्यादा शक्तियां मिल जाएंगी, जिसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है. यह विधेयक अब प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां इस पर अगले सत्र में चर्चा और मतदान होगा. लेकिन उससे पहले ही भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर अमेरिका के भीतर उठती आवाजें यह संकेत दे रही हैं कि इस फैसले का असर सिर्फ विदेश नीति ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। 

बिल में रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव
अमेरिका ने जो बिल तैयार किया है उसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री अधिकारियों, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और रूस की युद्ध कोशिशों से जुड़ी दूसरी संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। यह कानून उन पुराने और नए झंडे वाले तेल टैंकरों पर भी प्रतिबंध बढ़ाएगा जिनका इस्तेमाल रूस कथित तौर पर अपने एनर्जी एक्सपोर्ट पर लगे मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।
राष्ट्रपति के पास प्रतिबंधों या रोक को हटाने का अधिकार भी होगा अगर वे कांग्रेस को यह विश्वास दिलाते हैं कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

रूसी तेल खरीदने वाले मुल्कों पर पहले भी ट्रंप प्रशासन पाबंदी लगाता रहा है. हालांकि इस बार 100 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव बहुत ही सख्त माना जा रहा है. इस बिल को लाने के पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है। 

वर्तमान में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार हैं. रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की टाइम लिमिट को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर फाइन लगाएगा। 

वोटिंग के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने मीडिया से कहा, 'ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो इस जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक जंग में शामिल हैं। 

वहीं कुछ डेमोक्रेट्स ने चेताया कि यह बिल ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार देगा. अब यह बिल मंज़ूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में जाएगा, जहां 31 अगस्त को इस पर चर्चा होने की उम्मीद है। 

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