न्यू मार्केट में आग बुझाने में देरी, 400 रेहड़ियों के अतिक्रमण से दमकल का रास्ता रुका

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भोपाल

 बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ऊपर तक पहुंची और देखते ही देखते पास की 5-6 चार मंजिला दुकानों को चपेट में ले लिया। मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों में रखा दीवाली का स्टॉक जल गया।इनके आसपास लगी 10-12 रेहड़ियां भी पूरी तरह खाक हो गईं। दुकानदारों के मुताबिक नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आग की वजह से ज्यादा न्यू मार्केट की तैयारी और पहुंच को लेकर है। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक छोले-भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और ऊपर लगे बैनर तक पहुंची। दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर रखे थे।

सिलेंडर फटे या नहीं, इसकी पुष्टि फायर विभाग अभी नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आग बुझाने पहुंची दमकलों को संकरी सड़क, रेहड़ियों और अतिक्रमण के बीच रास्ता बनाकर घटना स्थल तक पहुंचना पड़ा। दुकानदार के मुताबिक इसमें 25 से 30 मिनट लग गए।

जहां से आग शुरू हुई, वहीं सबसे बड़ा सवाल सिलेंडर को लेकर

बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में बाहर की तरफ ही भट्ठी लगी है। प्रत्यक्षदर्शी नीलेश पाटिल के मुताबिक दोपहर में भटूरे बनाते समय अचानक आग भड़की। दुकान में उस समय करीब 50-60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही सभी बाहर भागे।

नीलेश के मुताबिक दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर भी रखे थे और धमाके हुए। हालांकि, नगर निगम के फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की बात तो कही है, लेकिन इनके ब्लास्ट होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह तहस-नहस हो गई है और यह भी जांचा जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे या नहीं।

मंदिर तक पहुंच सकती थी आग, दीवार ने बचाया
आग की चपेट में दुकान से सटा खेड़ापति हनुमान मंदिर भी आ सकता था। हालांकि मंदिर की दीवार के कारण आग वहां तक नहीं पहुंच सकी और मंदिर सुरक्षित रहा।

अतिक्रमण ने बढ़ाई दमकल की परेशानी
इस घटना के बाद न्यू मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा भी सामने आया। बाजार में दुकान के बाहर और आसपास काफी अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को अंदर पहुंचने में परेशानी हुई आग तेजी से फैल रही थी, जबकि फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने के लिए सीमित जगह में काम करना पड़ा। इससे आग पर काबू पाने में चुनौती बढ़ गई।

विधायक सबनानी ने कहा कि घटना से सबक लेते हुए न्यू मार्केट को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में दमकल और राहत वाहनों को आसानी से रास्ता मिलना जरूरी है।

25 फीट की लपटों ने ऐसे पकड़ीं एक के बाद एक दुकानें
छोले-भटूरे की दुकान से उठी आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे थे, जबकि ऊपरी हिस्से में फ्लैक्स और पोस्टर लगे थे। यही आग फैलने का जरिया बने। इसके बाद पास की मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों तक आग पहुंच गई।

दुकानदार संजय कुमार जैन के मुताबिक इन दुकानों में दीवाली का स्टॉक भरा था, जो पूरी तरह जल गया। सजावटी सामान, मोबाइल एक्सेसरीज और खाने-पीने की रेहड़ियां भी आसपास थीं। इनमें से 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं।

दुकानदारों के अनुसार कुल नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। इसकी अंतिम पुष्टि नुकसान के आकलन के बाद होगी।

दमकल को आधा घंटा क्यों लगा, जबकि फायर स्टेशन करीब 1 किमी दूर?
न्यू मार्केट के अंदर आने-जाने के करीब 10 रास्ते हैं। टीटी नगर थाने की ओर से दो और क्वॉलिटी रेस्टॉरेंट की ओर से एक प्रमुख रास्ते से वाहन आते-जाते हैं। आग वाली दुकानें टीटी नगर थाने के सामने वाले रास्ते की तरफ हैं।

दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक फायर कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कर्मचारियों को घटना स्थल की लोकेशन समझाने में भी समय लगा।

इसके बाद जब दमकलें अंदर पहुंचीं तो रास्ते में लगी रेहड़ियां और संकरी सड़क बड़ी बाधा बनीं। दुकानदार के मुताबिक दमकल को मौके तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग गए। माता मंदिर फायर स्टेशन यहां से करीब एक किलोमीटर दूर है।

सामने आया अहम सवाल – अगर फायर स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर है और न्यू मार्केट में कई प्रवेश मार्ग हैं तो दमकल को घटना स्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? क्या अतिक्रमण और रेहड़ियां सिर्फ रास्ते में थीं या पार्किंग और संकरी सड़क भी उतनी ही बड़ी बाधा बनी?

न्यू मार्केट में 900 दुकानें, करीब 400 रेहड़ियां
न्यू मार्केट में करीब 900 रजिस्टर्ड दुकानें हैं। इसके अलावा करीब 400 रेहड़ियां लगती हैं। खेड़ापति हनुमान मंदिर के सामने शाम के समय इतना अतिक्रमण रहता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

आग वाली जगह के पास और सामने भी रेहड़ियां लगी थीं। आग में 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। हादसे के दौरान इन्हीं रास्तों से दमकलों को अंदर लाने के लिए पुलिस और अन्य टीमों को लगातार रास्ता खाली कराना पड़ा।

न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी का कहना है कि हॉकर्स के अतिक्रमण के कारण दमकलों को अतिरिक्त समय लगा। उनके मुताबिक मल्टी लेवल पार्किंग पर एक स्टैंडिंग फायर ब्रिगेड रहती है, लेकिन न्यू मार्केट में दोपहिया फायर फाइटर की अतिरिक्त व्यवस्था भी होनी चाहिए।

फायर सेफ्टी की तैयारी कितनी?
न्यू मार्केट में कपड़े, सजावटी सामान, ज्वेलरी समेत कई तरह की दुकानें हैं। आग वाली लाइन में 10-12 छोले-भटूरे की दुकानें और रेस्टॉरेंट हैं। इनमें कई जगह भट्ठियां बाहर की तरफ लगी हैं।

फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानदारों को फायर सेफ्टी नियमों के पालन के लिए कहा जाता है और विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन हादसे ने अब यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ निरीक्षण और नोटिस से आगे बाजार में वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था कितनी है।

जिस दुकान से आग शुरू हुई, उस पर पहले भी अतिक्रमण की कार्रवाई
हादसे के बाद अतिक्रमण का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से आग शुरू हुई, उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदार से विवाद होने की बात भी सामने आई है।

भवन अनुज्ञा शाखा की ओर से भी नोटिस दिए गए थे। भदौरिया के मुताबिक करीब एक महीने पहले अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दिए गए थे और रेहड़ियां भी हटाई गई थीं, यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज रास्ते में अतिक्रमण था या नहीं, बल्कि यह भी है कि जिस अतिक्रमण पर पहले कार्रवाई हुई, वह दोबारा कैसे खड़ा हो गया?

अतिक्रमण हटेगा या फिर मामला ठंडा पड़ जाएगा?
न्यू मार्केट व्यापारियों की ओर से लंबे समय से हॉकर्स और अतिक्रमण की समस्या उठाई जाती रही है। हादसे के बाद यह मुद्दा फिर केंद्र में है। समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

अब सवाल यह है कि इस घोषणा के बाद कार्रवाई की समय सीमा क्या होगी? पहले दिए गए नोटिस और हटाए गए अतिक्रमण के बाद फिर से रेहड़ियां कैसे लग गईं? क्या पूरे बाजार का दोबारा सर्वे होगा और फायर एक्सेस के रास्ते स्थायी रूप से खाली रखे जाएंगे?

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