प्रकाश पर्व पर रोशनी से जगमगाया गोल्डन टेंपल, हरिमंदिर साहिब में उमड़ी भारी भीड़

Date:

अमृतसर.

पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंच रहे हैं।

गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज (12 सितंबर) विशेष धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल परिसर को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया है। बड़ी संख्या में संगत नतमस्तक होने के लिए पहुंच रही है।

पहले प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से गोल्डन टेंपल तक पुरातन परंपरा के अनुसार नगर कीर्तन सजाया। इसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। वहीं, गोल्डन टेंपल, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए जाएंगे। रात को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में शब्द विचार और कीर्तन समागम होगा। इसके साथ ही गोल्डन टेंपल परिसर में दीपमाला और आतिशबाजी भी की जाएगी।

गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य-
बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की।
बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।"
गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।”
समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Bastar मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल शिक्षा का विस्तार, डिप्लोमा-डिग्री कोर्स होंगे शुरू

जगदलपुर. डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इसी सत्र से पैरामेडिकल के...

मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर, चित्रकूट में बारिश के बाद बाढ़ का खतरा; 400 अतिक्रमण से बदली नदी की धार

चित्रकूट /सतना सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात...

मध्यप्रदेश में हाईटेक होंगी सुगम बसें, CCTV और गेटवे सॉफ्टवेयर से निगरानी; मोबाइल पर मिलेगा टिकट

 इंदौर  बस दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने...

J&K के डोडा में सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकी का शव बरामद, M4 कार्बाइन भी मिली

डोडा जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए...