बिना सुपरपावर की सुपरहीरो कैसे बनी ब्लैक विडो? असली जासूसों से प्रेरित है नताशा रोमनॉफ की कहानी

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अगर आपने गौर किया हो तो मार्वल की अवेंजर्स टीम में ब्लैक विडो यानी नताशा रोमनॉफ अकेली ऐसी सुपरहीरो हैं, जिनके पास कोई सुपरपावर नहीं है. न उनके पास उड़ने की ताकत है और न ही वे हल्क की तरह भारी-भरकम हैं. इसके बावजूद वे दुनिया के सबसे खतरनाक दुश्मनों से अकेले भिड़ जाती हैं. बिना सुपरपावर के भी उनका मार्वल की सबसे आइकॉनिक किरदारों में शामिल होना इसी कहानी का सेंटर भी बनता है l

नताशा रोमनॉफ के किरदार की जड़ें इतिहास की असली सीक्रेट जासूसों की कहानियों में दिखती हैं. क्यूंकि जिस वक्त मार्वल ने ये कैरेक्टर लॉन्च किया था, उस 1960 के दशक में अमेरिका और सोवियत संघ यानी रूस के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था, और उसी दौर की जासूसी ट्रेनिंग, केजीबी स्टाइल घुसपैठ, स्लीपर एजेंट्स और महिला ऑपरेटिव्स का असर ब्लैक विडो की कहानी में साफ नजर आता है l

कई किस्से पहले ही मशहूर हैं कि उस वक्त सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी KGB अपनी महिला जासूसों को बेहद कठिन और दर्दनाक ट्रेनिंग देती थी. इन महिलाओं को बचपन से ही बिना किसी भावना के सिर्फ मिशन पूरा करने की ट्रेनिंग दी जाती थी. उन्हें मार्शल आर्ट्स, हथियार चलाना, भाषाएं, लड़ाई, जासूसी और बातों-बातों में किसी को अपने जाल में फंसा कर राज उगलवाने में एक्सपर्ट बनाया जाता था. कुछ असली प्रोग्राम्स में ऐसी महिलाओं को कभी-कभी स्वॉलोज भी कहा जाता था l

यही वो दौर था, जब स्टेन ली मार्वल के एक-एक कैरेक्टर को गढ़ रहे थे. 1964 में स्टेन ली ने इन्हीं असली जासूसों से प्रेरणा लेकर एक ऐसा किरदार सोचा, जो मासूम दिखे लेकिन असल में एक खतरनाक रूसी स्पाइ हो. इसी सोच से नताशा रोमनॉफ का किरदार बना l
 
जो कहानी कॉमिक्स में बताई गई है, उसमें नताशा को कम उम्र में रेड रूम नाम के एक रूसी ट्रेनिंग प्रोग्राम में भेजा गया, जहां छोटी लड़कियों को घातक अंडरकवर एजेंट बनाया जाता था. रेड रूम को इस तरह दिखाया गया कि वह असली केजीबी ट्रेनिंग सेंटर जैसा लगे. इसी कहानी के बेस के साथ ब्लैक विडो का डेब्यू टेल्स ऑफ सस्पेंस #52 (1964) में हुआ l

इस किरदार को स्टेन ली ने प्लॉट, डॉन रिको ने स्क्रिप्ट और डॉन हेक ने आर्ट के साथ तैयार किया. शुरुआत में उन्हें एक सोवियत एजेंट और फेम फेटल के तौर पर दिखाया गया, जिसे आयरन मैन यानी टोनी स्टार्क को निशाना बनाने भेजा गया था. वह आयरन मैन के राज चुराने आई थी l

बाद में ये कैरैक्टर ऐसा बूम कर गया कि मार्वल ने ब्लैक विडो को विलेन से हीरो बना दिया. असली दुनिया की जासूसी ट्रेनिंग, रेड रूम का डार्क बैकग्राउंड, और बिना सुपरपावर के भी खतरनाक मौजूदगी ने ब्लैक विडो को एक रियल और पॉवरफुल किरदार बना दिया.

मार्वल ने जब कॉमिक्स के बाद फिल्मों के जरिए लोगों का दिल जीतना शुरू किया, तब ब्लैक विडो को इसमें आना ज़रूर था. और 2010 में आई आयरनमैन-2 में ब्लैक विडो को लॉन्च किया गया, जिसे स्कारलेट जोहानसन ने निभाया. इसके बाद एवेंजर्स की कई फिल्मों में ब्लैक विडो आई और यहां तक कि खुद अलग से उनकी फिल्में भी लॉन्च की गई. मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स की अबतक कुल 9 फिल्मों में ब्लैक विडो का कैरेक्टर दिखा है.

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