जबलपुर
सागर जिले में जहरीली शराब कांड में प्रशासन व पुलिस विभाग द्वारा आरोपियों के घरो पर बुलडोजर कार्रवाई व परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है।
मामले में आरोपी बनाया गया था शराब ठेकेदार
दरअसल, जहरीली शराब कांड के आरोपी सिद्धार्थ कुशावाहा व उसकी मां की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस व प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ अवैधानिक तरीके से कार्रवाई की जा रही है. इसी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. याचिका में कहा गया था कि पुलिस द्वारा दर्ज 36 एफआईआर में से सिर्फ एक एफआईआर में याचिकाकर्ता सिद्धार्थ कुशवाहा को आरोपी बनाया गया है. उस पर आरोप है कि उसकी दुकान से शराब खरीदकर पीने के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई है।
बुलडोजर कार्रवाई में निर्देशों का पालन नहीं
याचिका में आगे बताया गया कि प्रशासन द्वारा उसकी शराब दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा पत्थर के क्रशर की लीज को भी निरस्त कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि प्रशासन द्वारा बुलडोजर एक्शन के तहत उसके घर की बाउंड्री वॉल और प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा भी गिराया दिया गया है. इसके अलावा पुलिस परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के नाम पर कभी भी थाने बुलाती है या जबरदस्ती ले जाती है. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने एकलपीठ को बताया कि प्रशासन द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए 'डायरेक्शन ऑफ मैटर इन डिमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स' मामले में जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी राहत
इसके अलावा पुलिस द्वारा पूछताछ के नाम पर परिजनों को अनावश्यक रूप से परिजनों को परेशान किया जाना भी अवैधानिक है. याचिका पर जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गुरुवार व शुक्रवार को सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अपने आदेश में कहा है कि नियम विरुद्ध तरीके से याचिकाकर्ता की प्रॉपर्टी को क्षतिग्रस्त नहीं किया जाए और अनावश्यक रूप से परिजनों को भी परेशान न किया जाए।

