मनीष तिवारी की कांग्रेस नेतृत्व पर नाराजगी, कहा- पंजाब पर चर्चा से रखा गया दूर

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अमृतसर 
पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के बीच नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दिल्ली में बैठकों का दौर खत्म हो गया है। कांग्रेस हाईकमान अब किसी भी समय नेतृत्व परिवर्तन पर अपना फैसला सुना सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं। 

वहीं मनीष तिवारी ने बयान जारी करते हुए कहा कि पंजाब कांग्रेस में परिवर्तन के लिए हाईकमान ने पंजाब के 60-70 नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनकी राय ली है जबकि मुझे नहीं बुलाया गया है। उन्होंने कहा है कि वो भी पंजाब की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं और सांसद हैं।

मनीष तिवारी ने तो यहां तक कह दिया कि पंजाब में इस समय नेतृत्व परिवर्तन का सही वक्त नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी प्रधान को रिजल्ट देने के लिए कम से कम 24 महीने का वक्त चाहिए जबकि पंजाब में चुनाव के लिए सिर्फ छह से सात महीने का वक्त बचा है।

दिल्ली में पंजाब के 60-70 नेताओं से ली फीडबैक
पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन पर नेताओं व कार्यकर्ताओं की फीडबैक लेने के लिए हाईकमान ने तीन ऑब्जर्वर नियुक्त किए थे जिन्होंने दिल्ली में पंजाब के पंजाब के 60 से 70 सीनियर नेताओं से बैठक की और पूरे मामले का फीड बैक लिया। कमेटी में शामिल अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव ने पंजाब के नेताओं से मिली फीडबैक की रिपोर्ट तैयार करके पार्टी हाईकमान को सौंप दी है। उधर, राहुल गांधी व सोनियां गांधी ने भी प्रधान पद के पांच प्रमुख दोवेदारों के साथ वन टू वन मीटिंग की। बताया जा रहा है कि आज हाईकमान पंजाब नेतृत्व पर अहम फैसला ले सकता है।

राहुल गांधी व सोनिया गांधी ने की दावेदारों से वन-टू-वन मीटिंग
पंजाब कांग्रेस में प्रधान पद के पांच प्रमुख दावेदारों में वर्तमान प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम चल रहा है। इनसे ही राहुल गांधी ने वन टू वन मीटिंग की है।

पार्टी में कोई मदभेद नहीं, हाईकमान जो कहेगा सबको मंजूर
राहुल गांधी ने इन पांचों नेताओं से अलग-अलग बात की। राहुल गांधी से बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा और राजा वड़िंग ने मीडिया से कहा कि “पार्टी में कोई मतभेद नहीं है, और राहुल गांधी जो भी फैसला लेंगे, हम उसका पालन करेंगे।” उन्होंने कहा कि सभी ने स्पष्ट कर दिया है कि हाईकमान जो भी फैसला लेगा उसे सभी मानेंगे ओर पंजाब में सरकार बनाने के लिए काम करेंगे।

सुखजिंदर सिंह रंधावा को प्रधान बनाने का फेक लेटर हुआ वायरल
पूर्व डिप्टी सीएम एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी प्रधान पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। दो दिन पहले सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंजाब प्रधान बनाने का एक फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। लेटर सोशल मीडिया पर आते ही सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उसे फेक बताकर पुलिस को शिकायत दे दी थी।

कांग्रेस में चल रहा है जट्‌ट V/S दलित
पंजाब कांग्रेस में जट्‌ट V/S दलित की लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कई बार खुलकर सामने आ चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी फोरम पर यह मामला उठाया और कहा था कि पंजाब में पार्टी के सभी प्रमुख पदों पर जट्‌ट सिख नेता बैठे हैं जबकि दलितों काे दरकिनार किया गया है। चन्नी का वीडियो सामने आने के बाद उन्हें दिल्ली तलब किया गया था।

निकाय चुनाव में हार से राजा वड़िंग पर उठाए थे सवाल
तरनतारन उपचुनाव में बूटा सिंह पर दिए गए बयान के बाद से राजा वडिंग की खिलाफत पार्टी के अंदर खुलकर सामने आ गई थी। तब से ही पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की बात उठाने लगी। जिला परिषद व निकाय चुनाव में हार के बाद से राजा वडिंग के नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लगे। चरणजीत सिंह चन्नी व अन्य नेताओं ने तो पार्टी हाईकमान के सामने खुलकर कह दिया था कि जो अपने हलके के काउंसिलों को नहीं जिता सकते वो पंजाब क्या जिताएंगे? उसके बाद से लगातार नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दिल्ली में मंथन चल रहा है।

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