Project Gaja-Lok: करोड़ों साल पुरानी है छत्तीसगढ़ की गज विरासत, हाथियों के इतिहास से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य

Date:

विश्व एलीफेंट दिवस
प्रोजेक्ट गजलोक में खुलासा—करोड़ों वर्ष पुरानी है प्रदेश की गज विरासत

शैल चित्रों में सहेजी गई प्रदेश की गज परंपरा
विश्व एलीफेंट दिवस पर राज्य पुरातत्व संग्रहालय परिसर में आयोजित हुआ कार्यक्रम

भोपाल

करोड़ों वर्ष पहले जीवाश्म, जो हमारे संग्रहालयों में भी रखे हुए है, यह दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश विश्व के प्राचीनतम हाथी क्षेत्रों में से एक रहा है। भारत में एशियाई हाथियों की वैश्विक संख्या की 60 प्रतिशत आबादी पाई जाती है। इस दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में हाथी संरक्षण में मध्यप्रदेश का अति महत्वपूर्ण स्थान है। विश्व एलीफेंट दिवस पर राज्य पुरातत्व संग्रहालय परिसर भोपाल में इंटेक भोपाल चैप्टर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई।

पद्मडॉ. नारायण व्यास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के परिप्रेक्ष्य में आदिकाल से हाथियों का विशिष्ट स्थान रहा है। हमारी कला, संस्कृति तथा साहित्य में निरंतरता से उनका वर्णन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के शैलचित्रों में हाथियों का चित्रण हजारों वर्ष से होना इस बात का प्रतीक है कि ये हमारी सामाजिक संरचना के साथ बहुत ही गहराई से जुड़े हुए हैं।

इंटेक, भोपाल चेप्टर कन्वीनर मदन मोहन उपाध्याय ने बताया कि प्रोजेक्ट गजलोक का मध्यप्रदेश में विशेष महत्व है, और पिछले एक वर्ष से इंटेक, प्रदेश के सभी क्षेत्रों में हाथी से जुड़ी गाथाओं उनकी युद्ध में भूमिका, कला तथा संस्कृति में और लोकगाथाओं में उनके चित्रण का डॉक्यूमेंटेशन कर रहे है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है, हम संस्थागत पार्टनर के रूप में भूमिका निभा रहे है।

कार्यक्रम में पद्मडॉ. व्यास द्वारा "गजलोक-वाइल्ड-सेक्रेड-ईटरनल" फिल्म का विमोचन किया। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से बेहतर जनजागृति लाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में भारतीय हाथियों के सामान्य विचरण के बारे में बताया गया है। केरल और दक्षिण भारत के मंदिरों में हाथियों का विशेष स्थान जगजाहिर है। मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के गौतम हाथी का विशेष स्थान है। गढ़ा मंडला, गिन्नौरगढ़ के गौंड साम्राज्य में भी हाथी राजकीय चिन्ह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। धार राज्य की मुद्रा पर भी हाथी का निशान विद्यमान था। इसी प्रकार साँची के विश्व प्रसिद्ध यूनेस्कों स्मारक में जितना सुंदर चित्रण हाथियों का किया गया है, उतना शायद ही विश्व में किसी दूसरे स्थान पर देखने को मिले। गजलक्ष्मी के रूप में गज का चित्रण भी आता है। गणेश जी तो हमारे आराध्य देव अंनतकाल से हैं।

इंटेक भोपाल ने आग्रह किया है कि हाथियों से संबंधित जो भी कथा, कहानी या जानकारी विद्यमान हो उसे साझा किया जाये, जिससे उसे राष्ट्रीय अभिलेख में समाहित किया जा सके। कार्यक्रम में वन्यप्रेमी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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