Punjab News: बठिंडा कोर्ट सख्त, कस्टोडियल डेथ केस में 5 पुलिसकर्मियों पर मर्डर चार्ज फ्रेम

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बठिंडा
 बठिंडा के बहुचर्चित कथित हिरासत में मौत मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पंजाब पुलिस के पांच कर्मियों, जिनमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल है, के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलविंदर कुमार की अदालत ने आदेश दिया कि सभी आरोपित अब हत्या, साक्ष्य नष्ट करने, अपराधियों को बचाने के लिए झूठी सूचना देने व इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों में फर्जीवाड़ा करने के आरोपों का सामना करेंगे। मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी, जब अभियोजन पक्ष अदालत में अपने साक्ष्य पेश करेगा।

आरोपितों में तत्कालीन सीआइए- एक प्रभारी इंस्पेक्टर नवप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल राजविंदर सिंह व कांस्टेबल गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह और जसविंदर सिंह शामिल हैं। यह मामला अक्टूबर 2024 में बठिंडा के गांव लखी जंगल निवासी भिंदर सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार क्या है कहानी?
पुलिस का दावा था कि 17 अक्टूबर 2024 को अवैध हथियार रखने के मामले में भिंदर सिंह की तलाश के दौरान वह पुलिस टीम को देखकर बंद पड़े गुरु नानक देव थर्मल प्लांट की झील में कूद गया था। पुलिस के अनुसार, उसे बाहर निकालकर सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

हालांकि, मृतक के भाई सतनाम सिंह ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि भिंदर सिंह को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा और यातनाएं देने के कारण उसकी मौत हो गई।

तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुलदीप सिंह द्वारा की गई जांच में फोरेंसिक साक्ष्यों, आधिकारिक रिकार्ड व चिकित्सकीय गवाही के आधार पर पुलिस की डूबने से मौत की कहानी को अस्वीकार कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि भिंदर सिंह को कथित तौर पर वाटरबोर्डिंग जैसी यातना दी गई, जिसमें व्यक्ति के मुंह और नाक में पानी डालकर डूबने जैसी स्थिति पैदा की जाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मृतक को अवैध हिरासत में रखा गया था और बाद में उसकी मौत को दुर्घटनावश डूबने का रूप देने का प्रयास किया गया। फरवरी 2025 में प्रस्तुत न्यायिक जांच रिपोर्ट में पांचों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

पोस्टमार्टम दो दिन तक टालने पर उठे सवाल

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मृतक व तत्कालीन सीआइए प्रभारी के मोबाइल फोन की काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) घटना वाले दिन एक ही समय पर बुलाडेवाला गांव क्षेत्र में सक्रिय थीं।

इसके अलावा पोस्टमार्टम दो दिन तक टाले जाने पर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए। जांच में कहा गया कि पोस्टमार्टम में देरी इसलिए हुई ताकि मृतक के परिजनों पर पुलिस के पक्ष में बयान देने का दबाव बनाया जा सके।

27 नवंबर को अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा
अब अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। 27 नवंबर को अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा, जिसके बाद अदालत मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगी। यह मामला पंजाब में कथित हिरासत में मौत और पुलिस जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है।

 

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