राजस्व अदालतों में रिकॉर्ड 81.35% मामलों का निपटारा, आम लोगों को राहत

Date:

छत्तीसगढ़ में गति पकड़ता राजस्व न्याय

रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई अभूतपूर्व तेज़ी

​प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आम जन को सीधी राहत
                  

रायपुर

छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों को समयबद्ध सीमा में सुलझाने के लिए प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अभूतपूर्व बदलाव आया है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से रिकॉर्ड 3,80,224 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया गया है। इस प्रकार संपूर्ण राज्य में मामलों के निराकरण की दर 81.35 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि शेष 87,191 प्रकरणों के निपटारे के लिए भी लक्षित एवं सुव्यवस्थित प्रयास जारी हैं।

कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति, समय और धन की बचत

        राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ज़मीन और आजीविका से जुड़े नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने के साथ-साथ आम जन के समय और संसाधनों की बचत हो रही है, जिससे राज्य में पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।

​दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों का शानदार प्रदर्शन

        राजस्व न्याय की इस तीव्र गति में सबसे प्रेरणादायक तस्वीर राज्य के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिलों से सामने आई है, जहाँ प्रशासनिक पहुंच और त्वरित निर्णय क्षमता मिसाल बनी है। सुकमा जिला 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ 7,224 मामलों में से 6,697 का निपटारा किया गया है। इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334 प्रकरण), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137 प्रकरण) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

​बड़े ज़िलों में भी तेज़ी से सुलझ रहे ज़मीन-जायदाद के मामले

        भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में मिली यह सफलता प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, राज्य के अधिक केस भार वाले बड़े जिलों में भी प्रकरणों के निपटारे का सिलसिला पूरी तेज़ी से चल रहा है। बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरण, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494 प्रकरण, राजधानी रायपुर में 34,226 में से 29,824 प्रकरण, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरण, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 प्रकरण तथा कोरबा में 19,705 में से 15,747 मामलों को हल कर नागरिकों को राहत दी गई है।

​'ई-धरती' और आधुनिक सर्वेक्षण से संवरते भू-अभिलेख

       राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ राज्य सरकार 'ई-धरती' योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के ज़रिए भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण पर भी व्यापक काम कर रही है। राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों को मिलाकर कुल 1,027 ग्रामों का सर्वे हेतु चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूरा करके डाटा 'भुइयाँ पोर्टल' पर अपलोड भी कर दिया गया है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है।

​अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल और डिजिटल नक्शों का निर्माण

      अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में भी ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत एक ऐतिहासिक पहल है, जहाँ 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण कर अभिलेखों एवं नक्शों को 'भुइयां' और 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है तथा 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अतिरिक्त, ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त त्रुटियों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर बदलने की दिशा में भी काम तेज़ी से जारी है, जिसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि नजूल व परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरणों में है। वर्ष 2025-26 के लिए पात्र हितग्राहियों के सत्यापन एवं e-KYC की प्रक्रिया को भी प्रगति पर रखा गया है।

​वर्षों पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति

      न्यायालयीन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के अनुसार वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।      
        वर्तमान में 0 से 6 माह की अवधि के 51,401 मामले लंबित हैं, जबकि 6 माह से 1 वर्ष के 13,218 मामले, 1 से 3 वर्ष के 15,918 मामले, 3 से 5 वर्ष के 3,903 मामले और 5 वर्ष से अधिक अवधि के 2,751 प्रकरण लंबित सूची में हैं। इस वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य वर्षों पुराने प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हल करना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का स्थायी अंत हो सके।

राज्यभर में 80% से अधिक सफलता दर और प्रभावी समीक्षा

        प्रदेश के अन्य जिलों में भी 80 प्रतिशत या उससे अधिक निराकरण दर दर्ज की गई है, जिनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42,कोरिया 81.87,सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84,धमतरी 81.65 , बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

​पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर बढ़ते कदम

       डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और नियमित मॉनिटरिंग के इस सशक्त संगम से छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन आज अधिक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह जन-कल्याणकारी स्वरूप धारण कर चुका है।

विष्णु प्रसाद वर्मा
 सहायक संचालक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

छत्तीसगढ़ BJP संगठन में फेरबदल, कर्मवीर को मिली संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को...

अखिलेश यादव को M से केवल एक वर्ग दिखता है, मल्लाह नहीं दिखता: संजय निषाद

अखिलेश मल्लाह समाज के बेटे को विधान परिषद का...

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का आगाज, MP में आज से शुरू होगी नई सुविधा

मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस...

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: लक्ष्मी राजवाड़े

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़...