पंजाब कांग्रेस में आर-पार की स्थिति! बैठक टली, 2 शर्तों पर फंसी बात; चन्नी और रंधावा से करेंगे भूपेश बघेल मुलाकात

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 चंडीगढ़
 पंजाब कांग्रेस में चल रहे घमासान में अब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल संग बैठक के लिए तैयार हो गए हैं। शुक्रवार को यह बैठक संभावित है।हालांकि सूत्र बताते हैं कि चन्नी ने बड़ी शर्त रखी है कि इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग शामिल नहीं होंगे और मीटिंग कांग्रेस भवन में नहीं, किसी अन्य जगह होगी।

चंडीगढ़ में वीरवार को विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में चन्नी समर्थक सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, पूर्व विधायक भारत भूषण आशु, बरिंदर ढिल्लों सहित करीब दस नेताओं ने दो घंटे बैठक की।

भूपेश बघेल के साथ बैठक का लिया फैसला: रंधावा
बैठक के बाद रंधावा ने कहा कि सर्वसम्मति से प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बैठक का फैसला लिया है। बघेल ने भी बैठक होने की पुष्टि की है। बैठक में चन्नी व रंधावा चुनाव समिति की सूची को लेकर आपत्ति बघेल के समक्ष रखेंगे। विधायक परगट सिंह ने कहा कि पार्टी में कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, जिन्हें प्रभारी के सामने रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकजुट है और हमारा लक्ष्य 2027 के चुनाव में सत्ता में वापसी करना है। बैठक के बाद विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भी कहा कि हाईकमान से ऊपर कोई नहीं है। उधर, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा सब को बात रखने का हक है।

राहुल से मिलकर बड़ा फैसला लेंगे चन्नी

पंजाब कांग्रेस में चुनाव से करीब 8 महीने पहले टूट का खतरा बढ़ गया है। बगावती तेवर दिखा रहे पूर्व CM व जालंधर सांसद चरणजीत चन्नी के गुट की प्रभारी भूपेश बघेल से मीटिंग टल गई है। चन्नी गुट की शर्तों के बाद यह मीटिंग कैंसिल कर दी गई।अब ये मीटिंग कल हो सकती है। मीटिंग को लेकर चन्नी गुट की 2 शर्तें थीं, जिनमें कांग्रेस भवन में न मिलने और उसमें प्रधान राजा वड़िंग के मौजूद न होने की बात कही गई थी। माना जा रहा है कि इन पर सहमति नहीं बनी।

चन्नी के करीबी सोर्सेज का कहना है कि वह दिल्ली में ही राहुल गांधी से मिलना चाहते हैं ताकि अगर उन्हें चुनाव में बड़ी भूमिका मिलती है तो उस पर बघेल नहीं बल्कि सीधे राहुल गांधी की मुहर हो। इसके बाद ही वह आगे कोई बड़ा फैसला लेंगे।

वहीं कांग्रेस हाईकमान के किनारा करने के बावजूद पूर्व CM व जालंधर सांसद चरणजीत चन्नी ने AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के आगे सरेंडर से इनकार कर दिया है। बघेल 4 दिन से चंडीगढ़ में डटे हैं लेकिन चन्नी उनसे मिलने के लिए नहीं गए। आज (10 जुलाई) को खत्म होने वाला बघेल का 5 दिन का दौरा 3 दिन के लिए बढ़ सकता है।

हालांकि इतना जरूर है कि चन्नी हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब नहीं हो सके। उनके बातचीत के लिए राजी होने से 3 दिन से हाईकमान पर बना प्रेशर रिलीज हो गया। वहीं राजा वड़िंग पावरफुल बनकर निकले हैं। वह लगातार अपनी ताकत दिखा रहे हैं। बघेल भी हाईकमान के फैसले को सही ठहराने के लिए पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्‌ठल जैसे नॉन एक्टिव नेताओं से तक मुलाकात करने के लिए उनके घर जा रहे हैं।

चौथे दिन बघेल ने की पूर्व मुख्यमंत्री भट्ठल से मुलाकात
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के पांच दिवसीय दौरे का चौथा दिन भी बैठकों के बीच गुजरा। सुबह बघेल ने विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के घर बैठक की। इसके बाद पंजाब भवन में यूथ कांग्रेस के नए प्रधान और अन्य सदस्यों के साथ बैठक हुई।
रजिंदर कौर भट्ठल से मुलाकात की। शाम को भी कई नेताओं के घर बैठकों का दौर चला। दौरे के आखिरी दिन शुक्रवार को चन्नी खेमे के साथ बैठक सही रही तो बघेल शाम को दिल्ली रवाना होंगे और हाईकमान की अपनी रिपोर्ट देंगे।

 एक्सपर्ट  की राय  

    न बघेल जाएंगे, न चन्नी आएंगे: पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि चन्नी गुट ने हाईकमान पर जो प्रेशर पहले तीन दिन बनाए रखा वो उसे बरकरार नहीं रख सके। उधर, राजा वडिंग लगातार अपनी ताकत भूपेश बघेल को दिखाने में कामयाब रहे। चन्नी गुट की भूपेश बघेल से मुलाकात हो भी जाएगी लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी खुद बघेल से मिलने से परहेज करेंगे।चन्नी अगर खुद बघेल से मिलने जाएंगे तो वो सीधे सीधे बैकफुट पर होंगे और फिर कांग्रेस में उनकी अहमियत भी कम हो जाएगी। चन्नी अब भी राहुल गांधी के विदेश से लौटने का इंतजार कर रहे हैं। वो स्पष्ट कर चुके हैं कि राहुल गांधी मेरे नेता हैं और मेरे नेता रहेंगे। इससे साफ है कि वो बड़ा फैसला लेने से पहले राहुल गांधी को जरूर मिलेंगे।

    चन्नी पर सरेंडर न करने का दबाव दिख रहा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत सिंह चन्नी अगर भूपेश बघेल से मिलने जाते हैं तो यह सीधे तौर पर उनका सरेंडर माना जाएगा और उनके साथ जो नेता खड़े हैं उनके लिए भी मुसीबत हो जाएगी। राजा वडिंग इस पूरे एपीसोड में पावरफुल होकर निकल गए।उनका कहना है कि अगर बघेल इस गुटबाजी को खत्म करके नहीं गए तो अगले दिनों में कांग्रेस में फिर से उथल-पुथल की स्थिति बनेगी। चन्नी गुट में कई नेता ऐसे हैं जो कि राजा वडिंग को प्रधान मानने को तैयार नहीं हैं। चन्नी ऐसी स्थिति में नहीं रहेंगे कि वो अपने समर्थकों को टिकट दिला सकें। उधर, राजा वडिंग का विरोध करने की वजह से वो उनका टिकट कटवाने का पूरा जोर लगाएं। ऐसे में चन्नी गुट के नेता भी चरणजीत सिंह चन्नी पर अब सरेंडर न करने का दबाव बना रहे हैं।

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