कर्मचारियों की पेंशन को लेकर MP हाईकोर्ट में बड़ा मामला, सेवा अवधि पर बड़ी बेंच करेगी फैसला

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भोपाल 

एमपी में कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ा फैसला सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन और अर्हक सेवा क्वालीफाइंग सर्विस से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को लार्जर बेंच के समक्ष भेज दिया है। सिंगल बेंच ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व 4 निर्णयों में विरोधाभासी अभिमत सामने आने के बाद मामला बड़ी बेंच के विचारार्थ भेजने का निर्देश दिया। अब लार्जर बेंच तय करेगी कि नियमितीकरण अथवा नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल किया जा सकता है या नहीं? फैसला प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मामला नरसिंहपुर लोक निर्माण विभाग से चौकीदार पद से सेवानिवृत्त कल्याण सिंह की याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के बाद कोर्ट के चार विरोधाभासी फैसलों और अभिमतों को देखते हुए जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच ने मामले को बड़ी बेंच के सुपुर्द करने की बात कही। अब लार्जर बेंच तय करेगी कि कर्मचारियों के नियमित पद पर हुए संविलियन से पहले दी गई सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी या नहीं।

1985 में बने थे दैनिक वेतन भोगी
नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग से चौकीदार के पद से रिटायर हुए कल्याण सिंह गौंड़ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनकी नियुक्ति एक जुलाई 1985 को दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के रूप में हुई थी। 13 फरवरी 1997 को कल्याण सिंह गौंड़ का नियमित पद पर संविलियन कर दिया गया। वे 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए।

रिटायरमेंट के बाद दाखिल की याचिका
कल्याण सिंह गौंड़ की संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल नहीं किया गया। इसके खिलाफ उन्होंने 2019 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कल्याण सिंह गौंड़ ने दैवेभो के रूप में दी गईं सेवाओं का लाभ पेंशन में नहीं देने पर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार पाण्डेय और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने दलीलें दी।

जस्टिस दीपक खोत ने सुनवाई के दौरान मामले में चार फैसलों में विरोधाभासी अभिमत पाए। इस पर उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय को एक्टिंग चीफ जस्टिस के सामने केस प्रस्तुत करने को कहा। इसके साथ ही अब मामले में लार्जर बेंच ही फैसला सुनाएगी। लार्जर बेंच के सामने मुख्य रूप से यह तय होगा कि कामचलाऊ या आकस्मिक स्थापना और नियमित स्थापना में संविलियन के लिए दैनिक वेतन भोगी की पेंशन के लिए अर्हक सेवा क्या होगी। इसी के बाद प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पेंशन लाभ को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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