यमुना पुनरुद्धार पर सख्ती, 2026 तक सभी प्रोजेक्ट पूरे करने का लक्ष्य तय

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 चंडीगढ
हरियाणा में यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं की ग्राउंड रिपोर्ट जांचने के लिए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी अब स्वयं फील्ड में उतरेंगे। मंगलवार को अधिकारियों के साथ यमुना एक्शन प्लान की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की गुणवत्ता की कठोर जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वे स्वयं चयनित संयंत्रों का दौरा कर कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे। निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अगले साल 31 दिसंबर तक सभी परियोजनाओं को पूरा किया जाए ताकि यमुना नदी और उससे जुड़े सहायक नालों के जल की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।यमुना कैचमेंट एरिया में नए एसटीपी, सीईटीपी और माइक्रो-एसटीपी तथा अपशिष्ट जल डायवर्जन अवसंरचना के विकास पर तेजी से काम चल रहा है।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि 425 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) से अधिक अतिरिक्त सीवेज शोधन क्षमता तथा 150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन क्षमता से संबंधित परियोजनाएं विभिन्न स्तरों पर निविदा, स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में हैं।

औद्योगिक अपशिष्ट जल का भी उपचार किया जा सकेगा
पानीपत के जाटल रोड स्थित 10 एमएलडी क्षमता के मौजूदा एसटीपी के उन्नयन से घरेलू सीवेज के साथ-साथ औद्योगिक अपशिष्ट जल का भी उपचार किया जा सकेगा। करनाल के विभिन्न गांवों में छह माइक्रो-एसटीपी स्थापित करने से नालों में अनुपचारित ग्रे-वाटर के प्रवाह को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

सोनीपत में नाथूपुर और कुंडली में प्रस्तावित सीईटीपी तथा राठधना एसटीपी की क्षमता में वृद्धि से अपशिष्ट जल उपचार अवसंरचना को और मजबूती मिलेगी। बैठक में गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रस्तावित सीईटीपी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई, जिनमें प्रतापगढ़, मिर्जापुर तथा गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

मुंगेशपुर ड्रेन पर विशेष ध्यान दिया गया। यहां अनुपचारित अपशिष्ट जल को उपचार सुविधाओं की ओर मोड़ा जा रहा है। इस ड्रेन के दिल्ली में प्रवेश करने से पहले जल गुणवत्ता सुधारने के लिए बायो-रिमेडिएशन उपायों की योजना बनाई जा रही है। प्रमुख नालों पर चिन्हित डिस्चार्ज प्वाइंट्स को व्यवस्थित रूप से टैप किया जा रहा है, ताकि अनुपचारित अपशिष्ट जल प्राकृतिक जल स्रोतों तक न पहुंच सके।

होगी नियमित निगरानी
मुख्य सचिव ने सभी एसटीपी और सीईटीपी में निर्धारित मानकों के अनुसार अपशिष्ट जल का निष्कासन सुनिश्चित करने तथा नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही नालों में कचरा फेंकने तथा अवैध रूप से अपशिष्ट जल छोड़ने की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रवर्तन उपाय अपनाने पर बल दिया।

यमुना एक्शन प्लान के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण, एचएसआइआइडीसी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिला प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, सोनीपत और रोहतक में अपशिष्ट जल उपचार से संबंधित प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएं वर्तमान में निविदा और स्वीकृति चरण में हैं।

 

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