25 दिन बाद दोबारा पहुंची टी, फूल-मालाओं से ग्रामीणों ने किया स्वागत

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हांसी
करीब 25 दिन पहले जिस टी-कनेक्शन को प्रशासन ने रातों-रात उखाड़ दिया था, उसी टी के दोबारा गांव पहुंचने पर बुधवार को चानौत में एक बार फिर त्योहार जैसा माहौल देखने को मिला।

गांव से करीब दो किलोमीटर पहले टी को जेसीबी पर रखकर धरना कमेटी के सदस्य जुलूस के रूप में गांव तक लेकर पहुंचे। जेसीबी पर सवार कमेटी सदस्यों का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और नारों के साथ स्वागत किया। धरनास्थल पर पहुंचने के बाद टी पर लड्डू रखकर उसका स्वागत किया गया और पूरे गांव में मिठाई बांटी गई।

सबसे अधिक उत्साह महिलाओं में देखने को मिला। महिलाओं ने ढोल की थाप पर नाच-गाकर अपनी खुशी का इजहार किया, जबकि युवाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर लंबे संघर्ष की सफलता का जश्न मनाया। धरनास्थल पर सुबह से ही ग्रामीणों का जमावड़ा लगा रहा और हर चेहरे पर जीत की खुशी साफ दिखाई दे रही थी।

ग्रामीणों को 20 जून की वह तस्वीर भी याद आई
ग्रामीणों को 20 जून की वह तस्वीर भी याद आई, जब पहली बार गांव में टी लगाई गई थी। उस दिन भी गांव में लड्डू बांटे गए थे और लोगों ने इसे अपनी जीत बताया था। उस समय पूर्व सरपंच सोमेश कुमार ने सरकार की ओर से मध्यस्थता होने की बात कही थी, लेकिन तीन दिन बाद 23 जून की रात प्रशासन ने टी को अवैध बताते हुए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उसे उखाड़ दिया था।

उस रात ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध किया था। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर लोगों को पीछे हटाया और टी को हटाया गया। बाद में 1500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया तथा इस प्रकरण में सोमेश शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था।

उस घटना के बाद आंदोलन और तेज हो गया था, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई वार्ता के बाद गांव को 36 इंच की मुख्य लाइन से 4 इंच की टी मिलने पर संघर्ष का सुखद अंत होता दिखाई दिया।

इस अवसर पर व्यापार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन राजेश ठकराल भी गांव पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर मौजूद लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का उदाहरण है। उनके पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।

'संघर्ष और संवेदनशील निर्णय से निकला समाधान'
व्यापार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन राजेश ठकराल ने कहा कि पानी की जरूरत शहर को भी थी और गांव को भी। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस लाइन से टी देना संभव नहीं माना जा रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के बीच हुई बातचीत से एक ऐसा रास्ता निकला, जिससे दोनों पक्षों का हित सुरक्षित हुआ।

ठकराल ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लोगों के शांतिपूर्ण संघर्ष और सरकार के संवेदनशील दृष्टिकोण का परिणाम है। उन्होंने आंदोलन में शामिल प्रत्येक ग्रामीण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संयम और एकजुटता ने इस आंदोलन को सफलता तक पहुंचाया।

याद रहेगा मनोहर लाल का फैसला
ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार लगी टी कुछ ही दिनों में उखाड़ दी गई थी, लेकिन अब जो टी मिली है, वह केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की पहल और सहमति से मिली है। लोगों ने कहा कि लंबे समय तक गतिरोध रहने के बावजूद उन्होंने दोनों पक्षों की बात सुनी और ऐसा समाधान निकाला, जिससे गांव की मांग भी पूरी हुई और शहर की पेयजल परियोजना भी आगे बढ़ सकेगी। ग्रामीणों ने कहा कि यह फैसला वर्षों तक याद रखा जाएगा। उनके अनुसार संघर्ष की सफलता के साथ सरकार ने भी सकारात्मक पहल कर विश्वास कायम किया है।

 

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