सब्जियों की कीमतों में बड़ा खेल! तोरई कहीं ₹6 तो कहीं ₹60, हरी सब्जियों के रेट ने चौंकाया

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नईदिल्ली
हरी सब्जियों के रेट कहीं आसमान पर हैं तो कहीं जमीन पर। शहर वाले जहां हैरान हैं तो वहीं गांव और छोट कस्बे के लोग मौज काट रहे हैं। छोटी मंडियों में भिंडी 3 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा जबकि, तोरई 6 रुपये किलो बिक रही। हालांकि, यही सब्जियां छोटे कस्बों और गांव की फुटकर मंडियों में 10 रुपये किलो हैं तो दिल्ली और मुंबई में 40 से 80 रुपये किलो।

सबसे पहले बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी की। यहां मंगलवार को तोरई 6 रुपये किलो बिकी, भिंडी सुबह 3 रुपये बिक रही थी, लेकिन दो घंटे बाद ही इसे 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा था। परवल इस मंडी में 100 रुपये में 5 किलो मिल रहा था।

कुशीनगर के मथौली नगर पंचायत की फुटकर मंडी में हरी सब्जियों रेट जमीन पर आ गए हैं।
मुंबई में हरी सब्जियों के दाम सुनकर रह जाएंगे दंग

अब मुंबई का रेट भी सुन लीजिए। कुशीनगर जिले के दीनानाथ रस्तोगी एक सब्जी की दुकान मुंबई में है। उन्होंने हिन्दुस्तान को जो फुटकर रेट बताया, उन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जिस भिंडी को कुशीनगर में 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में 60 से 80 रुपये किलो बिक रही है। 15 रुपये किलो वाला करेला मुंबई में 80 रुपये फुटकर में और थोक में 60 रुपये किलो है।

यहां 10 रुपये वाला बैगन भी वहां 60 रुपये किलो है। ग्वारफली 60, नेनुआ यानी तोरई 60 रुपये बिक रहा है। जो परवल कुशीनगर में 20 रुपये किलो था, वह मुंबई में 60 रुपये किलो है।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। उनके मुताबिक दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को भिंडी 16 रुपये, करेला 4 रुपये, गोभी 20 रुपये, तोरई 40 रुपये किलो बिकी। दूसरे नंबर की तोरई 6 रुपये और एक नंबर तोरई 13 -18 रुपये किलो थी। दूसरी ओर लौकी 5 रुपये, टिंडा 13 से 15 रुपये, मटर 40 से 55 रुपये, खीरा 24 रुपये, ग्वार फली 20 रुपये, ककोड़ा 45 रुपये और मूली 10 रुपये प्रति किलो के रेट से बिकी।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
दिल्ली में फुटकर में खीरा 50 रुपये किलो और गोभी 80 रुपये किलो बिक रही हैं। तोरई भी 60 रुपये और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। करेला 40 रुपये किलो और मटर 30 रुपये में 250 ग्राम यानी 120 रुपये किलो बिक रही है। टिंडा भी 100 से 120 रुपये किलो है।

थोक और फुटकर रेट में क्यों है इतना अंतर
सब्जी बिक्रेता शिवसागर बताते हैं कि मंडी से रेहड़ी तक सब्जियों को लाने में ढुलाई पहले की तुलना में अब अधिक लग रही है। कच्चा सौदा होने के कारण 10 प्रतिशत सब्जियां शाम तक खराब हो जाती हैं। ग्राहक को एक नंबर का माल चाहिए ऐसे में सब्जियों की छंटाई होती है। उन्होंनें बताया कि अगर 10 किलो तोरई मंडी से 13 रुपये के हिसाब से लाते हैं तो 130 रुपये पड़ती है। माल भाड़ा, दुकान का किराया और अपनी मेहनत जोड़ लें तो यह कुल 180 रुपये ही हो जाएगी।

धनिया-मिर्चा जिसे मुफ्त समझते हैं, वह भी फ्री नहीं मिलते
अब इसकी छंटाई करें तो मुश्किल से 6 किलो की तोरई एक नंबर की निकलेगी। यानी अब इसी खरीद रेट करीब 30 रुपये हो जाएगी। इसी तरह का नियम सभी हरी सब्जियों पर लागू होता है। वहीं, दीनानाथ रस्तोगी बताते हैं कि मुंबई में कीमतें थोक में भी बहुत अधिक हैं और मार्जिन कम है, ऊपर से मुफ्त धनिया-मिर्चा देना पड़ता है। इनका भी रेट इन्हीं सब्जियों पर रखने की मजबूरी है।

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