जीपीएम के पर्यटन विकास मॉडल की सराहना, स्थानीय जनसहभागिता और प्राकृतिक धरोहरों को बताया पर्यटन संवर्धन की सशक्त आधारशिला

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रायपुर

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रवास के दौरान जिले की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया तथा जिले की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को समेटे जीपीएम पर्यटन कॉफी टेबल बुक भेंट कर जिले की पर्यटन उपलब्धियों और संभावनाओं से अवगत कराया गया।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि जिले के पर्यटन स्थलों को स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जोड़कर विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिल रही है।

प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने जीपीएम जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल राजमेरगढ़  का  भ्रमण किया।

 उन्होंने पर्यटन समितियों द्वारा संचालित गतिविधियों, पर्यटकों के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों का अवलोकन किया। इस दौरान स्थानीय पर्यटन समितियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जनसहभागिता के माध्यम से पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है।

भ्रमण के दौरान पर्यटन समितियों ने स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यटन के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी हैं।

प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। यहां पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करता है।

उन्होंने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यटन समितियां जिस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने समितियों से भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण, पर्यटक-अनुकूल, स्वच्छ, सुरक्षित एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही राज्य के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके।
इस अवसर पर पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, पर्यटन समितियों के प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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