कचरे से कमाई का कमाल! पन्ना में ग्रामीण महिलाएं प्लास्टिक से बना रहीं खूबसूरत स्मृति चिन्ह

Date:

पन्ना 

 पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के वन गांवों में कभी झाड़ियों और जंगल के किनारे दिखाई देने वाला प्लास्टिक अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन रहा है। जिस कचरे से वन्यजीवों को खतरा पैदा होता था, उसे महिलाएं साफ करने के बाद प्रोसेस कर बैग, फोल्डर, स्टेशनरी और स्मृति चिन्ह जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को पर्यटक अपने साथ यादगार के तौर पर ले जा रहे हैं।

2022 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने वर्ष 2022 में पन्ना पार्क में 'प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस' शुरू किया था। इसका उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए केवल समय-समय पर सफाई अभियान चलाना नहीं, बल्कि एक स्थायी और सामुदायिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना था।

यह पहल 14 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों में लागू की गई। अब तक इन क्षेत्रों से 45 टन से अधिक कचरा एकत्र कर उसकी छंटाई और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग की जा चुकी है।

प्लास्टिक से तैयार हो रहे उपयोगी प्रोडक्ट
कचरे की छंटाई के बाद करीब 42 प्रतिशत गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक इकोकारी को भेजा जाता है। यह एक सामाजिक उद्यम है, जो प्लास्टिक को उपयोगी सामग्री में बदलने का काम करता है।

इसके बाद गांवों की वर्कशॉप में महिलाएं प्रोसेस किए गए प्लास्टिक से अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं। इसके लिए पारंपरिक चरखे और हथकरघे का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह प्लास्टिक कचरे को उत्पाद में बदलने के साथ पारंपरिक कारीगरी को भी नए पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ा गया है।

महिलाओं के लिए रोजगार से आगे की पहल
इस प्रोजेक्ट का मकसद केवल महिलाओं को काम या वेतन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं। वहीं पर्यटकों के लिए तैयार किए गए स्मृति चिन्ह पन्ना के जंगलों और उन समुदायों से जुड़ी याद बन रहे हैं, जो इनके संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।

इस मॉडल में पर्यटन से पैदा होने वाला कचरा उसी गंतव्य के आसपास एकत्र होता है। फिर उसे स्थानीय स्तर पर अलग कर प्रोसेस किया जाता है और पारंपरिक शिल्प के जरिए नए उत्पाद में बदला जाता है। इसके बाद वही उत्पाद पर्यटन अर्थव्यवस्था में वापस पहुंचता है।

2025 में बांधवगढ़ तक पहुंचा मॉडल
पन्ना में शुरू हुआ यह प्रयोग अब आगे बढ़ चुका है। 2025 में मध्य प्रदेश ने इस मॉडल को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों तक विस्तार दिया। राज्य का ग्रामीण पर्यटन मिशन अब 100 से अधिक गांवों को कवर करता है और 300 से अधिक महिलाओं के स्वामित्व वाले होमस्टे और नेचर भ्रमण स्थलों को समर्थन दे रहा है।

इसमें प्राणपुर भी शामिल है, जिसे भारत के पहले हथकरघा शिल्प गांव के रूप में प्रमोट किया जा रहा है। यहां महिलाएं हथकरघा कैफे भी संचालित करती हैं।

स्वच्छ वातावरण के लिए मिला SKOCH Silver Award
इस प्रोजेक्ट को 2025 में स्वच्छ वातावरण के लिए SKOCH Silver Award से सम्मानित किया गया। राज्य सरकार ने उद्योग मानकों के अनुरूप पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन यानी ESG फ्रेमवर्क अपनाने का भी उल्लेख किया है।

मध्य प्रदेश की जिम्मेदार पर्यटन रणनीति में प्लास्टिक-मुक्त वन्यजीव क्षेत्र, इलेक्ट्रिक-व्हीकल मोबिलिटी, कम-कार्बन आर्किटेक्चर और सामुदायिक आजीविका को एक साथ जोड़ा जा रहा है। ऐसे में पन्ना का मॉडल सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आ रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

दिल्ली से गुरुग्राम का सफर होगा और तेज, द्वारका-महिपालपुर से हरियाणा बॉर्डर तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी

गुरुग्राम गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के...

PF से पैसे निकालने वालों के लिए जरूरी खबर, इमरजेंसी में कितना मिलेगा फंड? समझें नए नियम

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन ने अपने करोड़ों स्‍टेकहोल्‍डर्स...

MP में फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 15 हजार नई बसों का मेगा प्लान; 2030 तक पूरा होगा लक्ष्य

इंदौर  इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय 'यात्री...