लागत तक नहीं निकलने पर किसान का छलका दर्द, खेत में चलाया ट्रैक्टर

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 बड़वानी

 जिले के ग्राम करी में बैंगन की फसल के दाम नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने अपनी चार बीघा फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया।

शुक्रवार को सामने आई इस घटना ने किसानों के बीच चिंता और चर्चा का विषय बना दिया है। किसान का कहना है कि मंडी में बैंगन का भाव इतना गिर गया कि तोड़ाई और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया था।

सेंगाव निवासी किसान राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में चार बीघा जमीन पर बैंगन की खेती की थी।

फसल तैयार करने में उन्होंने और परिवार के सदस्यों ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन बाजार में उचित दाम नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।

एक बीघा में 50 हजार तक की लागत

किसान के मुताबिक, एक बीघा बैंगन की खेती में करीब 50 हजार रुपए खर्च हुए। इसमें खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी शामिल है। इस हिसाब से चार बीघा में कुल लागत दो लाख रुपए से अधिक पहुंच गई। अच्छी पैदावार होने के बावजूद लागत निकलना भी मुश्किल हो गया।

50-60 बोरी बैंगन लेकर पहुंचे मंडी

  •     राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि वे 50 से 60 बोरी बैंगन लेकर मंडी पहुंचे थे।
  •     प्रत्येक बोरी में करीब 50 से 60 किलो बैंगन भरा था।
  •     उन्हें उम्मीद थी कि बैंगन 10 से 12 रुपए किलो तक बिकेगा।
  •     लेकिन मंडी में भाव करीब 1 रुपए किलो मिला। कई व्यापारियों ने इस भाव पर भी खरीदने में रुचि नहीं दिखाई।
  •     किसान ने कहा कि ऐसी स्थिति में फसल तोड़ने, मजदूरी देने और मंडी तक ले जाने का खर्च भी निकलना संभव नहीं था।
  •     मजबूरी में उन्होंने खेत में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया।

“घाटे से बचने के लिए पशुओं को खिला रहे बैंगन”

किसान के बेटे ने बताया कि इस बार बैंगन की बंपर पैदावार हुई थी, लेकिन दाम गिरने से किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कुछ किसान फसल खेत में ही छोड़ रहे हैं, जबकि कई किसान बैंगन पशुओं को खिला रहे हैं, ताकि अतिरिक्त नुकसान से बचा जा सके। दीपक के अनुसार, सीजन की शुरुआत में अच्छी गुणवत्ता वाला बैंगन करीब 5 रुपए किलो तक बिका था, लेकिन पिछले 20 दिनों से लगातार भाव गिरते जा रहे हैं। अब हालत यह है कि व्यापारी एक रूपये किलो में भी बैंगन खरीदने से बच रहे हैं।
महंगे डीजल और ट्रांसपोर्ट को बताया वजह

किसान परिवार ने संकट के लिए बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत और सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि डीजल महंगा होने से भाड़ा बढ़ गया है, जिसके कारण बाहर के व्यापारी बड़वानी मंडी से माल उठाने नहीं आ रहे। मंडी में बैंगन की आवक तो लगातार हो रही है, लेकिन खपत नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 

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