जब झारखंड पहुंचे महात्मा गांधी, मजदूरों-किसानों से किया संवाद; जानें उनकी 6 ऐतिहासिक यात्राएं

Date:

रांची
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का झारखंड से गहरा और ऐतिहासिक नाता रहा है, जिन्होंने अपनी विभिन्न यात्राओं के दौरान इस क्षेत्र में चंपारण सत्याग्रह की रणनीति से लेकर रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन तक अहम भूमिका निभाई। कोयला खदानों से लेकर दलित उत्थान तक, बापू के कदम झारखंड की माटी पर अमिट छाप छोड़ गए। आइए जानते हैं उनकी इन ऐतिहासिक यात्राओं के बारे में।

एक ऐसी भूमि जहां कोयला की कालिमा और किसानों की पीड़ा के बीच उन्होंने अहिंसा की मशाल जलाई। तत्कालीन बिहार के हिस्से रहे झारखंड में गांधीजी की कम से कम छह प्रमुख यात्राएं दर्ज हैं, जो चंपारण सत्याग्रह से लेकर रामगढ़ कांग्रेस तक फैली हैं।

इनमें रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, झरिया (धनबाद) और डालटनगंज जैसे इलाकों में उन्होंने मजदूरों, किसानों और हरिजनों से संवाद किया, फंड संग्रह किया और सामाजिक सुधारों को गति दी।

कोयला उद्योगपतियों से मिले दान से लेकर हिंसक विरोध तक, ये यात्राएं गांधीजी की विरासत का जीवंत हिस्सा हैं। आइए, क्रमवार इन ऐतिहासिक पड़ावों पर नजर डालते हैं।

1917: चंपारण की राह में रांची
गांधीजी की झारखंड से पहली मुलाकात 4 जून 1917 को हुई, जब वे वर्धा आश्रम से चंपारण जा रहे थे। रांची पहुंचकर उन्होंने स्थानीय नेताओं से चर्चा की और चंपारण के नील किसानों के शोषण पर रणनीति बनाई।

इसी साल जमशेदपुर (तत्कालीन कालिमाटी) से गुजरते हुए उन्होंने किसानों की दुर्दशा पर ध्यान केंद्रित किया। यह यात्रा सत्याग्रह की नींव रखने वाली थी, जिसने गांधीजी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

1921: असहयोग की लहर झरिया तक
1921 में असहयोग आंदोलन के सिलसिले में गांधीजी झरिया (धनबाद) पहुंचे, जहां कोयला मजदूरों की समस्याओं पर फोकस किया। उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में अहिंसा और स्वदेशी का प्रचार किया, जिससे मजदूरों में जागृति आई।

इसी साल नवंबर में झरिया में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस का दूसरा सत्र हुआ, जो गांधीजी के प्रभाव से प्रेरित था। हालांकि फंड संग्रह अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन यह दौरा झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने वाला साबित हुआ।

जब जमशेदपुर आए थे गांधी जी, युनाइटेड क्लब में लगी बापू की तस्वीर। (सौजन्य: सुरेश संथोलिया)

1925: जमशेदपुर में मजदूरों से संवाद
सितंबर 1925 में गांधीजी रांची पहुंचे, जहां खादी और ग्रामोद्योग जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। हजारीबाग में सरस्वती देवी और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया।

जमशेदपुर में उन्होंने टाटा वर्कर्स यूनियन की नींव रखी, मजदूरों की समस्याएं सुनीं और यूनाइटेड क्लब में सभा को संबोधित किया।टाटा परिवार की सराहना की और देवघर में हरिजनों को मंदिर प्रवेश की परंपरा की प्रशंसा की। राजेंद्र प्रसाद और फ्रंटियर गांधी उनके साथ थे।

1927: डालटनगंज में दलित उत्थान का आह्वान
1927 में गांधीजी डालटनगंज (पलामू) पहुंचे, जहां राजेंद्र प्रसाद के साथ दलित उत्थान पर फोकस किया। ग्रामीण समुदायों से बातचीत की और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। यह यात्रा झारखंड के पिछड़े इलाकों में गांधीवादी विचारों को फैलाने में सहायक रही।

1934: देवघर में खतरे का सामना
1934 में गांधीजी झरिया (धनबाद) पहुंचे, जहां हरिजन उत्थान और राष्ट्रीय शिक्षा के लिए फंड संग्रह किया। स्थानीय लोगों ने 60 हजार रुपये दान दिए, जिसमें कोयला उद्योगपतियों और मारवाड़ी व्यापारियों का बड़ा योगदान था।

जमशेदपुर में जवाहरलाल नेहरू के साथ स्टील वर्क्स का दौरा किया और हरिजन बस्तियों में धन संग्रह किया। लेकिन देवघर में 25 अप्रैल को जसीडीह स्टेशन पर पंडों ने लाठियों से हमला किया, कारण था हरिजन मंदिर प्रवेश अभियान। गांधीजी की अहिंसा ने स्थिति को शांत किया।

1940 में रामगढ़: झारखंड का ऐतिहासिक क्षण
1940 में गांधीजी की अंतिम प्रमुख यात्रा रांची में हुई, जहां रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया। कोकर में जायसवाल परिवार के घर रुके। कार से रामगढ़ गए। खादी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। नेहरू, पटेल जैसे नेताओं के साथ यह सत्र स्वतंत्रता की दिशा तय करने वाला था।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ चौधरी कहते हैं- गांधीजी की झारखंड यात्राएं स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, मजदूर अधिकार और हरिजन उत्थान पर केंद्रित रहीं। आज उनका कमरा और कार संरक्षित हैं। झरिया की खदानें उनकी स्मृतियों को सहेजे हुए हैं। ये यात्राएं झारखंड की विरासत को रोशन करती रहेंगी, युवाओं को प्रेरित करती हुईं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

पूर्वी चंपारण में बड़ा हादसा, नहाने के दौरान गहरे पानी में गईं 4 बच्चियां; डूबने से मौत

 पूर्वी चंपारण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक बड़ा...

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर किया नमन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री ...

गांधी जयंती पर खादी को बढ़ावा, CM योगी ने किया 25% छूट का ऐलान; 30 जनवरी 2027 तक मिलेगा लाभ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो अक्टूबर शुक्रवार को राष्ट्रपिता...

मध्यप्रदेश पर्यटन की प्रमोशनल फिल्म ‘द सितारिस्ट’ को e4m PrimeTime Awards में मिला गोल्ड अवॉर्ड

भोपाल  मध्यप्रदेश पर्यटन की प्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, वैभवशाली इतिहास...