इमरान खान ने अस्पताल में रहने से क्यों किया इनकार? पीटीआई का दावा- सेना को दिया बड़ा संदेश

Date:

लाहौर
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को शुक्रवार (21 अगस्त) की सुबह सरकारी 'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (PIMS) में चिकित्सा जांच के बाद रावलपिंडी की अडियाला जेल वापस भेज दिया गया है। चिकित्सा जांच के दौरान अल-शिफा अस्पताल के डॉक्टर भी मौजूद रहे। यह कार्रवाई पाक सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश के अनुपालन में की गई, जिसमें खान को दो दिन के भीतर अस्पताल पहुंचाने का निर्देश दिया गया था। अदालत के समक्ष पेश की गई एक चिकित्सीय रिपोर्ट में कहा गया था कि वह ''लेवल थ्री प्लस एंग्जायटी'' (बेचैनी, घबराहट और चिंता) की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद इमरान खान को अडियाला जेल से इस्लामाबाद के 'शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल' में स्थानांतरित किया गया था लेकिन अब वह वापस जेल पहुंच चुके हैं।

अब पाकिस्तान में ये चर्चा जोरों पर है कि आखिरकार इमरान खान को इतनी जल्दी अस्पताल से जेल क्यों शिफ्ट कर दिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक वह करीब दो महीने तक अस्पताल में रह सकते थे। इस पर उनकी पार्टी की तरफ से कहा गया है कि इमरान खान का देश की सेना के साथ कोई समझौता करने का इरादा नहीं है और वह अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों से आगे भी लड़ते रहेंगे। न्यूज 18 से बातचीत में इमरान खान के एक करीबी सहयोगी डॉ. सलमान अहमद ने कहा कि खान पाक सेना प्रमुख के जाल में फंसने वालों में नहीं हैं और उन्होंने खुद ही अपनी जांच कराने के बाद फौरन अस्पताल वापस जाना चुना है।

जेल तुरंत वापस क्यों लौटे इमरान खान?
डॉ. सलमान अहमद ने दावा किया है कि इमरान खान ने मेडिकल जांच के बाद तुरंत वापस अदियाला जेल जाकर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को राजनीतिक रूप से 'चेकमेट' (मात) दे दी है। उन्होंने इस बारे में बताया कि दरअसल, खान नहीं चाहते थे कि अस्पताल जाने की घटना को सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ से दी गई कोई रियायत या सेना के साथ किसी गुप्त समझौते के सबूत के तौर पर दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि इमरान खान ने शिफा इंटरनेशनल जाकर वहां एक महीने तक रहने से इनकार कर दिया, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक कैदी के तौर पर मेडिकल जांच करवाना और अपने परिवार व बेटों से मिलना उनका अधिकार है।

सेना राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती थी
उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का मानना ​​था कि अस्पताल जाने की घटना का सेना राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती है। अहमद ने कहा, "एक तरह से, मुझे लगता है कि खान साहब ने आसिम मुनीर को 'चेकमेट' कर दिया। मुनीर दुनिया को यह दिखाना चाहते थे कि वह बहुत अच्छे इंसान हैं और खान साहब की परवाह करते हैं, और खान नहीं चाहते थे कि ऐसा प्रचार हो कि उन्होंने कोई समझौता किया है।" उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर इमरान खान को नवाज शरीफ समझने की भूल कर बैठे लेकिन इमरान खान ने उनके प्लान पर ही पानी फेर दिया।

'नवाज शरीफ की तरह देश छोड़कर नहीं भागेंगे'
सलमान अहमद ने पाकिस्तान के अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों, विशेष रूप से नवाज शरीफ की तुलना करते हुए कहा कि अतीत में नेताओं ने बाहर निकलने या निर्वासन के लिए समझौते किए हैं, लेकिन इमरान खान देश छोड़कर नहीं जाएंगे। खान का मानना है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं और वे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़कर खुद को निर्दोष साबित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि खान की यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संस्थागत सुधारों, कानून के शासन और लोकतांत्रिक नागरिक सर्वोच्चता (civilian supremacy) की स्थापना के लिए है। उनका मानना ​​है कि भारत की तरह ही यहाँ भी कानून का शासन, लोकतंत्र और नागरिक सर्वोच्चता होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “मुझे तो कभी भारतीय सेना प्रमुख का नाम भी पता नहीं चला। इमरान खान कह रहे हैं कि हमें आगे बढ़ना होगा; यह व्यक्तियों के बारे में नहीं, बल्कि संस्थाओं के बारे में है। वह लोकतांत्रिक शासन चाहते हैं।”

जारी रहेगा लंबा संघर्ष, 27 मार्च को देशव्यापी प्रदर्शन
अस्पताल से सीधे जेल लौटने के इमरान खान के फैसले ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक कड़ा संदेश दिया है कि उनका नेता किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने वाला है। अगर खान सलाखों के पीछे रहते हैं, तो पीटीआई सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के साथ एक लंबे संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसे वे वर्तमान परिस्थितियों में एकमात्र विकल्प मानते हैं। अपनी इसी रणनीति के तहत पार्टी ने 27 मार्च को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। बता दें कि इमरान खान, जो 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे, कई कानूनी मामलों के कारण हिरासत में हैं। उनकी पार्टी बार-बार उनकी रिहाई की मांग करती रही है, जबकि सरकार और अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों को कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए निपटाया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

इंग्लैंड में पाकिस्तान की हालत खराब, पहली पारी में 234 रन पीछे और दूसरी पारी की शुरुआत भी शर्मनाक

नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट टीम का इंग्लैंड में हाल खराब...

Heat Dome से ग्लोबल वार्मिंग तक, क्यों तेजी से तप रहा यूरोप? समझिए पूरी वजह

नई दिल्ली  यूरोप इन दिनों सिर्फ गर्म नहीं हो रहा,...

एक अधिकारी-एक मॉडल स्कूल: बिहार में अब अफसर करेंगे सरकारी स्कूलों की निगरानी, हर 3 महीने PTM

 पटना  सरकार ने 551 अधिकारियों को एक-एक सरस्वती विद्या निकेतन...

CM Awas Yojana: यूपी के इन परिवारों को मिलेगा पक्का मकान, ऐसे करें आवेदन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के...