हरियाणा के हिसार में AI से बनी ‘दादी-पोते का प्रेम’ शॉर्ट फिल्म, केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक और छात्राओं की अनोखी पहल

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हिसार.

हर गुरुजी के पढ़ाने का तरीका व नजरिया अलग-अलग होता है। कुछ पाठ्यक्रमों में बंधकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं तो कुछ अपनी अलग सोच-दृष्टिकोण में पूरे अध्याय पर केवल मंथन करते हैं अपितु कक्षा में बैठे हर एक बच्चे तक पाठ्यक्रम से मिलने वाली सीख पहुंचाने के लिए तरीकें इस्तेमाल में लाते हैं।

ऐसे ही हिसार सैनिक छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में अंग्रेजी विषय के शिक्षक संतोष काना है। जिन्होंने 11वीं कक्षा के अध्याय महिला का चित्र शीर्षक पर आधारित वापसी: बैक टू द रूटस पर 8.30 मिनट की यू-ट्यूब शार्ट फिल्म बनाई। यह शार्ट फिल्म ग्रामीण आंचल में रह रहे दादी-पाेते के बीच गहरे प्रेम को दर्शा रही है। इस फिल्म में अहम भूमिका में विज्ञान संकाय की वर्तिका व वाणिज्य संकाय की अनुष्का व खुशी शामिल है।

30 दिन में बनाई शार्ट फिल्म
शिक्षक संतोष काना ने बताया कि जून में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसमें तीनों विद्यार्थी वर्तिका, अनुष्का व खुशी ने उत्सुकता दिखाई। एक से दो दिन तो मंथन करने में लग गए कि शार्ट फिल्म को कैसे बनाए। क्योंकि पात्र लेकर किरदार निभाते हैं तो चुनौतियां भी काफी होगी और समय भी अधिक खर्च होगा। जिसके बाद शिक्षक ने एआई का विकल्प दिया। जिस पर तीनों विद्यार्थी राजी हो गए। उसके बाद एआई की मदद से शिक्षक सहित चारों सदस्यों ने डोक्यूमेंट्री पर आधारित 8.30 मिनट की शार्ट फिल्म बना दी।

ये है शिक्षक संतोष काना की उपलब्धियां

  • – टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप और कोर्स के लिए रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्यरत
  • – भारतीय दूतावास के तहत नेपाल के काठमांडू के केंद्रीय विद्यालय में अहम भूमिका निभाई
  • – 2011 से छात्रों के साथ पाठ्यक्रमों से संबंधित कई अध्यायों पर शार्ट फिल्म बनाई और रेडियो के लिए नाटक बनाए
  • – केरल में छात्रों के साथ मिलकर इनोवेटिव प्रोजेक्ट पर बेहतरीन कार्य करने के लिए नई दिल्ली स्थित केंद्रीय विद्यालय में प्रशंसा पत्र से सम्मानित
  • – नेपाल स्थित काठमांडू पर एक यात्रा-वृतांत नामक तीन किताबें प्रकाशित की
  • – अंग्रेजी व मलयालम भाषा में कई कविताएं भी लिखी है

यह है यू-ट्यूब शार्ट फिल्म का अंश
एक गांव में परिवार रहता है। जिसमें बेटा-बहू रोजगार के लिए शहर शिफ्ट हो जाते हैं। पीछे परिवार में दादी-पोते रह जाते हैं, जोकि एक साथ समय बिताते है। एक दिन पोते को भी शहर से बुलावा आ जाता है। जिसके बाद दादी-पोते शहर शिफ्ट हो जाते हैं। मगर वहां पोता-दादी एक साथ समय नहीं बिता पाते। एक दिन दादी ने पोते से सवाल किया कि स्कूल में क्या भगवान के बारे में बताते हैं। जैसे ही ना का जवाब मिला तो दादी उदास हो गई और चली गई। समय बितता रहा। पोते ने कालेज की पढ़ाई पूरी कर विदेश में शिफ्ट हो गया। पीछे से दादी उदास रहने लगी। 7 साल बाद पोता घर लौटा तो दादी से मिला। लेकिन वो पहले वाली उत्सुकता नहीं दिखी। एक दिन दादी की तबीयत खराब हुई और चल बसी। जिसके बाद पोते को सूनापन काटने लगा।

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