धृतराष्ट्र के 7 पाप, जिन्होंने महाभारत में तय किया कुरुक्षेत्र युद्ध का रास्ता

Date:

 महाभारत एक ऐसा महान ग्रंथ है जिसमें अनेक पात्र और उनके जटिल जीवन प्रसंगों का वर्णन मिलता है. इन सभी पात्रों में एक नाम है धृतराष्ट्र. जी हां, वही धृतराष्ट्र, जिनका जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों ही रहस्यों से भरे हुए हैं. कहा जाता है कि धृतराष्ट्र ने अपने जीवन में कई ऐसे कर्म किए, जिन्हें पाप माना जाता है. इन्हीं पापों के कारण अंततः उनकी मृत्यु अग्नि में जलकर हुई थी. आज हम उन 7 प्रमुख पापों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने धृतराष्ट्र के पतन की नींव रखी.

महाभारत में धृतराष्ट्र को भी कुरुक्षेत्र युद्ध का जिम्मेदार माना जाता है. क्योंकि वे चाहते तो इस युद्ध को रोक सकते थे, लेकिन पुत्र मोह में उन्होंने अपने ही वंश का नाश कर दिया था. यह कहना गलत नहीं होगा कि वे केवल आंखों से ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से भी अंधे हो चुके थे. आइए जानते हैं उनके उन 7 पापों के बारे में.

गांधारी के साथ धोखा
धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से हुआ. विवाह से पहले ज्योतिषियों ने चेतावनी दी थी कि गांधारी का पहला विवाह अशुभ होगा. इसलिए उनका पहले एक बकरे से विवाह कराया गया और बाद में उसे बलि देकर धृतराष्ट्र से विवाह कर दिया गया. यह एक प्रकार का छल ही था.

गांधारी के परिवार को कारागार में डालना
जब धृतराष्ट्र को यह बात पता चली, तो उन्होंने क्रोधित होकर गांधारी के पिता राजा सुबल और उनके पूरे परिवार को जेल में डाल दिया. उन्हें भोजन भी बहुत कम दिया जाता था, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएं. इसी में शकुनि बच गए थे.

पुत्र मोह में युद्ध को बढ़ावा देना
धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन के अन्याय को कभी नहीं रोका था. वे चाहते तो महाभारत का युद्ध टल सकता था, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का साथ दिया और पूरे वंश का विनाश होने दिया.

द्रौपदी चीरहरण पर मौन रहना
जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब धृतराष्ट्र चुप रहे. यह महाभारत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक थी, जिसने महाभारत के युद्ध की आग को भड़काया था.

अधर्म का साथ देना
धृतराष्ट्र जानते थे कि दुर्योधन और शकुनि अधर्म कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने उनका साथ दिया. उन्होंने विदुर और संजय जैसे ज्ञानी लोगों की सलाह को भी अनसुना कर दिया.

भीम को मारने का प्रयास
महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव उनसे मिलने आए, तो धृतराष्ट्र ने भीम को मारने की योजना बनाई. लेकिन श्रीकृष्ण ने उनकी चाल समझ ली और भीम की जगह लोहे की मूर्ति आगे कर दी, जिसे धृतराष्ट्र ने तोड़ दिया.

पूर्व जन्म का पाप
कहा जाता है कि पिछले जन्म में धृतराष्ट्र एक क्रूर राजा थे, जिन्होंने एक हंस की आंखें निकलवा दी थीं. मरते समय हंस ने उन्हें श्राप दिया था, जिसके कारण अगले जन्म में वे अंधे पैदा हुए और उनके पुत्रों का भी विनाश हुआ.

मृत्यु का रहस्य
माना जाता है कि महाभारत युद्ध के 15 साल बाद धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और संजय वन में चले गए थे. एक दिन जंगल में आग लग गई थी. धृतराष्ट्र ने वहां से जाने से मना कर दिया था और गांधारी व कुंती भी उनके साथ रुक गईं. अंततः तीनों अग्नि में जलकर मृत्यु को प्राप्त हुए थे, जबकि संजय हिमालय की ओर चले गए थे. बाद में नारद मुनि ने युधिष्ठिर को यह समाचार दिया, और उन्होंने सभी की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक कार्य किए थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

पटना नगर निगम का बड़ा प्लान: 4400 दुकानदारों को मिलेगा आधुनिक वेंडिंग जोन में ठिकाना

पटना पटना के फुटपाथी दुकानदारों को जल्द ही नया ठिकाना...

राज्यसभा चुनाव में पोलिंग एजेंट की भूमिका अहम, क्रॉस वोटिंग रोकने पर नजर

रांची  झारखंड में दो सीटों के लिए निर्धारित राज्यसभा चुनाव...

केंद्र सरकार की 12 वर्ष की उपलब्धियों पर प्रदर्शनी, जनकल्याण योजनाओं का प्रदर्शन

 जयपुर केंद्र सरकार के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूर्ण होने के...

महिला की मौत पर बड़ी कार्रवाई कायम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को मिली कोर्ट की मंजूरी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले...