Baba Farid University में हड़कंप, 200 कर्मियों पर गिरी गाज; 24 डॉक्टरों की प्रमोशन रद्द

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पटियाला.

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर विवाद गहरा गया है। यूनिवर्सिटी ने हाल ही में नियुक्त किए गए 200 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

वहीं, सामान्य पूल में पदोन्नत किए गए करीब दो दर्जन डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है। ये डॉक्टर गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात थे। यह कार्रवाई 11 अगस्त को हुई यूनिवर्सिटी के प्रबंधन मंडल की बैठक के बाद की गई। बैठक में इन नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई गई। प्रबंधन मंडल का कहना है कि कई नियुक्तियों में यूनिवर्सिटी के निर्धारित नियमों और विनियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद सभी नियुक्तियों को निलंबित कर प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा का फैसला लिया गया। इसके लिए एक समिति भी गठित की गई है।

पदों की मंजूरी और बजट पर भी सवाल
आरोप है कि कई नियुक्तियां प्रबंधन मंडल से पदों की मंजूरी और बजट संबंधी स्वीकृति लिए बिना की गईं। इनमें अनुसंधान अधिकारी और सहायक प्रोफेसर समेत कई समूह-ए के पद भी शामिल हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में कुछ ऐसे विभागों के पद सृजित किए गए, जो वहां मौजूद ही नहीं हैं। बताया जा रहा है कि कई नवनियुक्त कर्मचारियों को निलंबन आदेश जारी होने से पहले एक माह का वेतन भी नहीं मिला था। वहीं, पूर्व कुलपति के कार्यकाल में पहले नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारियों का वेतन भी रोक दिया गया है।

पूर्व कुलपति ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद ने नियुक्तियों का बचाव करते हुए प्रबंधन की कार्रवाई को हास्यास्पद बताया। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में करीब डेढ़ साल तक प्रबंधन मंडल की बैठक नहीं हुई, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद नियुक्तियों की समीक्षा के लिए बैठक बुला ली गई। डॉ. सूद का कार्यकाल जून में समाप्त हुआ था। उन्होंने दावा किया कि नियुक्तियां प्रबंधन मंडल की मंजूरी के बाद हुई थीं और नियुक्ति पत्रों पर दो सदस्यों के हस्ताक्षर थे। इनमें फरीदकोट के विधायक गुरदित सिंह सेखों भी शामिल थे। प्रबंधन मंडल के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह वांडर ने कहा कि यूनिवर्सिटी नियुक्तियों और पदोन्नतियों की जांच एवं समीक्षा कर रही है। हालांकि, उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया। कुछ नियुक्ति पत्र पूर्व कुलपति का कार्यकाल समाप्त के कई दिन बाद जारी होने की बात भी आई है।

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